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Hindi poem : corona times

अब तो दिवरो की लकीरो से भी
पुछते है,बाता कीसमत मे लिखा क्या है
यु तो बिसतर पे फैले रेहते है आजकाल
चुभ जाती है डर किसीं करवट पर ||1||

तबियत से धोते है टमाटर सब कोई
काश रिशतो पर इतनी मेहनत कर ली होती
दूर से ही सही कोई पडोसी पुछ ले
जिंदा तो हो ? और हाल कैसा है? ||2||

किसीं ने भी सोचा नाही होगा
इंटेरियर वाले घर मे नेटफ्लिक्स देखना
हर रात,अपने खायलो से दूर भागना
सिनेमा को जिना, आसान नही होगा||3||

ये नही, की कॉल नाही करते यार मेरे
हालचाल,फिकर,सुहानी दौर के फेरे
चाशनी मे अटकी चिंटी जैसी हालत
जिंदा होने की खुशी मानाना.. लानत ||4||

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